बुधवार, 19 अगस्त 2009

एक रचना...नही रही..

कमसे कम तस्वीरों के रूप मे ये यादें हैं!!'बर्ड हाउस' मे स्विच है...इस तस्वीर का close up दे चुकी हूँ...जहाँ पत्थर रचे हुए दिख रहे हैं, वो एक 'dry water fall' का concept था...
उसपे केवल रेत डाल रखी थी..और फाइबर के बने लैंप शेड लगा दिए थे..रात मे वो पारदर्शी पत्थरों का आभास दिलाते...

जो सुराही दार मिट्टीका घडा दिख रहा है, वह 'water scuptor' बनाया था...छोटी-मोटर पास ही मे ज़मीन मे गाड़ दी थी...ढक्कन पे गमले रख दिए थे...

11 टिप्‍पणियां:

  1. देखिये प्रकृति में अजर अमर कुछ भी नहीं ,जो चीज आज पैदा हुई है कल नष्ट होगी ही ,इसलिए निस्पृह भाव से [बिना मोह माया में लिप्त हुए ] अपना काम करते रहना चाहिए
    मैं जब अपना नया घर बनवाऊँगी ,आपको वहाँ इन कलाकारियों के लिए जरूर बुलाऊँगी ,आयेंगी न .

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  2. बागवानी पर पहला ब्लाग देखा है । वाकई खूबसूरत है । आता रहूंगा ।

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  3. सब धराशायी हो गए..और उन्हें धराशायी करनेवाले सब 'बाहुबली' थे..हैं...
    Well expression...

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  4. bahut hi achchi prastuti.........जो सुराही दार मिट्टीका घडा दिख रहा है .....mujhe zaroor dijiyega.........


    bahut hi achchi peshkash...........

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  5. aapki yeh foto ........ bahut kuch kah jaatin hain..... yeh foto aapki bhi ek sansmaran lagti hai...... baagbaane......... ka koi paudha......

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  6. पोधों की क्या बिसात यहाँ इंसान का टिकाना नहीं होता !

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  7. i read ur blog more than 2 weeks back but never got to comment..

    what i feel so strongly is that you are a person filled with the power to love unconditionally. its a power only the strong can weild. You give so much care to these plants.. and most of us cant love even other human beings.

    beautiful..

    plz update soon.

    PS: would love to hear from you at my blog too

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  8. Shama ji.. DUssehre ki shubhkaamnae..

    main aapka suggest kiya hua forum jaldi hi check karungi aur aapko contact karungi.

    :)

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  9. शमा जी,आप की बागवानी की कला,अच्छी लगी,सराहनिय

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