गुरुवार, 2 जुलाई 2009

गूलर का बोनसाय

इसपे लगे हुए फल नज़र आ रहे हैं..इस पेड़ ने कई पारितोषिक जीते...अफसोस, के एक बार मेरे अस्पताल मे रहते, पेड़ों की निगरानी ठीक से नही हुई...लौटी तो, देखा, १५ पौधे दम तोड़ चुके थे....उन मे से ये एक था....बेहद दुःख हुआ....
और अब इन घटनाओं को मै एक मेहेज़ इत्तेफाक नही मानती.....गर ज़्यादा बीमार हो जाती हूँ, तो बरसात के मौसम मे भी कई पौधों के पत्ते ,पतझड़ का मानो मौसम हो, इस तरह झड़ जाते हैं...!

8 टिप्‍पणियां:

  1. पेड़ के बारे में! आपके अस्पताल में रहने पर नहीं!

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  2. पेड़ पोधे भी बच्चों की तरह होते हैं!! और ये भी आपको मिस करते हैं!! ये सच्चाई है !! आप किसी पोधे से इतना प्रेम करो जितना एक जानवर या इंसान से तो खुद बी खुद प्रमाण मिल जायेगा !!

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  3. आपने देखा होगा की जब humeN किसी bacche पर beinthaa प्यार आता है तो उसके लिए शब्द नहीं होते ..एक प्यार bhara chumban bacche की peshani पर होता hai.. बस इसी तरह आपका blog है आपकी bagvani है कहानी कविता or lalitlekh है..jinki tariif मई शब्द नहीं होते .
    मई भी कुछ uljhano से नेट से दूर हूँ कुछ समय से isliye लिखना padhna कम ही हो रहा है ..आपकी kamii mehsoos होती है .
    miss u always .
    Neer

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  4. बहुत प्यारा बोनसाई है .. मुझे फिर मेरी एक बहुत पुरानी कविता याद आ गई.." बच्चों की तरह होते हैं पेड/पुचकारो नहीं तो रूठ जाते हैं/उपेक्षा की आन्धियों में टूट जाते हैं..." वैसे हिन्दी सहित्य मे एक कहानी भी है गूलर का फूल .लेखक का नाम फिलहाल याद नही आ रहा .ये बताइये इस बोनसाई मे फूल पहले आते है या फल?

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  5. आपकी सृजनात्मकता को देख, हम बेहद मुतास्सिर हुए. बराहे मेहरबानी एक नज़र इधर भी- http://www.thenetpress.com/

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  6. पौधे भी प्यार से ही सिंचित होते है!आपका ये ब्लाग बहुत सुंदर है!

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